विश्व अस्थमा दिवस पर मुक्ता प्रसाद वाल्मीकि बस्ती स्कूल में स्वास्थ्य शिविर आयोजित
विश्व अस्थमा दिवस पर मुक्ता प्रसाद वाल्मीकि बस्ती स्कूल में स्वास्थ्य शिविर आयोजित


विशेषज्ञों ने दी धूल और धुएं से बचने की सलाह


बीकानेर, 5 मई। विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर मंगलवार को विश्वकर्मा गेट के बाहर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, मुक्ता प्रसाद वाल्मीकि बस्ती में एक दिवसीय अस्थमा जागरूकता, चिकित्सा एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच के साथ-साथ अस्थमा से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने पर जोर दिया गया।


इनहेलर लत नहीं, सुरक्षा है: डॉ. श्याम अग्रवाल
शिविर में बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ और चाइल्डहुड अस्थमा एंबेसडर डॉ. श्याम अग्रवाल व उनकी टीम ने सेवाएं दीं। डॉ. अग्रवाल ने छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि अस्थमा का सटीक इलाज संभव है, बशर्ते इसे लेकर लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने महत्वपूर्ण सुझाव दिए:
बचाव ही उपचार: बच्चे धूल, धुएं और प्रदूषण से जितना संभव हो उतना बचें।
इनहेलर का महत्व: इनहेलर को लेकर समाज में कई भ्रांतियां हैं, लेकिन यह कोई लत नहीं बल्कि फेफड़ों की सुरक्षा का सबसे प्रभावी उपाय है।
जीवनशैली में बदलाव: डॉ. अग्रवाल ने बच्चों को फास्ट फूड का उपयोग बंद करने और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह दी।
20 वर्षों का अनुभव और विशेषज्ञता
एडवांस अस्थमा कोर्स प्राप्त डॉ. श्याम अग्रवाल पिछले 20 वर्षों से चाइल्डहुड अस्थमा एंबेसडर के रूप में सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि जस्सूसर गेट के बाहर उनके अस्पताल में विशेष चाइल्ड अस्थमा क्लिनिक संचालित किया जा रहा है, जहाँ बच्चों में अस्थमा के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर उनका नियमित उपचार किया जाता है।
स्कूल प्रशासन ने जताया आभार
शिविर के दौरान स्कूल के व्याख्याता भवानी शंकर राजपुरोहित, रामेश्वरजी, भवानी शंकर व्यास, कोमल जोशी और श्रीमती इंदिरा पारीक ने भी विचार व्यक्त किए। स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती संतोष गखड़ ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर चिकित्सक टीम का आभार व्यक्त किया। शिविर में आधुनिक उपकरणों के माध्यम से कई बालक-बालिकाओं के फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच भी की गई।

