घरेलू विवाद का खौफनाक अंत: सास-बहू की जलकर दर्दनाक मौत

उदयपुर में सास-बहू की जलकर मौत, मौके पर मिले सिर्फ अवशेष
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उदयपुर, 8 अगस्त, 2025: राजस्थान के उदयपुर ज़िले के बड़गांव थाना क्षेत्र के जिंडोली गाँव में गुरुवार रात एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जहाँ घरेलू विवाद के चलते सास और बहू, दोनों की जलकर मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है और कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विवाद से आग तक का सफर
पुलिस के अनुसार, रात करीब 10:30 बजे, 35 वर्षीय मांगीबाई गमेती का अपने पति गोपीलाल उर्फ गोपा के साथ किसी घरेलू बात पर तीखा झगड़ा हो रहा था। यह बहस लगभग आधे घंटे तक चली। इस दौरान 65 वर्षीय सास पप्पा बाई ने कई बार बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते चले गए। गुस्से में मांगीबाई घर के सामने बने बाड़े में चली गईं। बताया जा रहा है कि उन्होंने स्वयं पर डीजल या केरोसिन छिड़ककर खुद को आग के हवाले कर दिया। उनकी चीखें सुनकर सास पप्पा बाई तुरंत उन्हें बचाने दौड़ीं। दुर्भाग्यवश, बचाने की कोशिश में वे भी आग की लपटों में घिर गईं।

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सूखी घास ने बढ़ाई भयावहता
बाड़े में सूखी घास और अन्य ज्वलनशील सामग्री बड़ी मात्रा में पड़ी हुई थी, जिससे आग ने पलभर में ही विकराल रूप ले लिया। लपटें इतनी तेज़ थीं कि पति गोपीलाल और गाँव के अन्य लोग पानी से आग बुझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन कोई भी नज़दीक नहीं जा सका। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद बड़गांव थाना पुलिस, फायर ब्रिगेड और नागरिक सुरक्षा विभाग की टीम ने आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी – दोनों महिलाओं के सिर्फ जले हुए कंकाल और पैरों के कड़े ही बरामद हो पाए।

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पुलिस जांच और अनसुलझे सवाल
पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है और मामले की गहनता से जांच कर रही है। यह घटना एक बार फिर घरेलू कलह के खतरनाक अंजाम और परिवार के भीतर संवाद की कमी के घातक परिणामों को उजागर करती है। हालांकि, इस हादसे ने कुछ गहरे सवाल भी पैदा किए हैं— क्या इस विवाद में कोई और छुपा कारण था? क्या यह सिर्फ गुस्से का नतीजा था, या इसके पीछे कोई ऐसा राज था जो अंदर ही अंदर सुलग रहा था? उदयपुर की यह दुखद घटना केवल एक खबर नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है कि पारिवारिक विवादों और संवादहीनता को नजरअंदाज करने की कितनी भयानक कीमत चुकानी पड़ सकती है। एक छोटी सी चिंगारी भी रिश्तों और जिंदगियों को लीलने वाली लपटों में बदलते देर नहीं लगाती।

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