शिविरा पंचांग’ में संशोधन की मांग को लेकर गरमाया शिक्षा विभाग

शिविरा पंचांग' में संशोधन की मांग को लेकर गरमाया शिक्षा विभाग
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  • शिक्षक व विद्यार्थी हितों पर कुठाराघात बर्दाश्त नहीं

बीकानेर, 2 अप्रैल 2026। शिक्षा विभाग द्वारा जारी ‘शिविरा पंचांग 2026-27’ को लेकर राजस्थान के शिक्षक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (राजस्थान) ने निदेशालय के नए कलेंडर को शिक्षक और छात्र हितों के प्रतिकूल बताते हुए सरकार से इसमें अविलंब संशोधन की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेंगे।

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विवाद के तीन मुख्य बिंदु: वार्ता के आश्वासन को दरकिनार करने का आरोप
प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा और वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि आचार्य ने बताया कि शिक्षा सचिव और निदेशक के साथ हुई पूर्व वार्ता में तीन प्रमुख बिंदुओं पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी, लेकिन जारी किए गए पंचांग में उन सभी को नजरअंदाज कर दिया गया है।

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1. ग्रीष्मावकाश में कटौती और पी.एल. (PL) का गणित
प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने तर्क दिया कि राजस्थान सेवा नियमों के तहत शिक्षा विभाग एक ‘विश्राम कालीन’ विभाग है। इसी कारण शिक्षकों को अन्य विभागों की तरह 30 के बजाय केवल 15 पी.एल. (अर्जित अवकाश) देय होती है।

विरोध: सरकार ने ग्रीष्मावकाश में कटौती कर दी है।

मांग: यदि अवकाश कम किए जाते हैं, तो शिक्षकों को भी अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह 30 पी.एल. दी जानी चाहिए। संगठन की मांग है कि ग्रीष्मावकाश पूर्व की भांति 17 मई से 30 जून तक यथावत रखे जाएं।

2. प्रचंड गर्मी और विद्यालय समय में बदलाव
महामंत्री महेंद्र लखारा ने कहा कि मार्च महीने से ही राजस्थान में भीषण गर्मी का प्रकोप शुरू हो जाता है।

विरोध: वर्तमान में विद्यालय का प्रातःकालीन समय (7:30 से 1:00 बजे) 1 अप्रैल से लागू करने का प्रावधान है।

मांग: छात्र हितों को देखते हुए इस समय परिवर्तन को 1 मार्च से ही लागू किया जाना चाहिए ताकि बच्चों को दोपहर की तपिश से बचाया जा सके।

3. प्रधानाध्यापक के विशेषाधिकार वाले अवकाश
स्थानीय परिस्थितियों, मेलों और त्योहारों को देखते हुए अब तक संस्था प्रधान (प्रधानाध्यापक/प्रधानाचार्य) को वर्ष में 2 अधिकृत अवकाश घोषित करने का अधिकार था।

विरोध: नए पंचांग में इसे घटाकर मात्र 1 कर दिया गया है।

मांग: इसे पुनः बढ़ाकर 2 अवकाश किया जाए ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार विद्यालय प्रबंधन निर्णय ले सके।

संगठन की चेतावनी: “आंदोलन ही अंतिम विकल्प”
प्रदेश उपाध्यक्ष ओमप्रकाश विश्नोई और प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्यों (संपत सिंह, अमरजीत सिंह, बसंत जिंदल, सुषमा बिश्नोई, गीता जैलिया, कैलाश कच्छावा) ने एक स्वर में कहा कि अधिकारियों की मनमानी से शिक्षकों में भारी आक्रोश है। वार्ता के दौरान बनी सहमति को दरकिनार करना सरकार की छवि को धूमिल करने जैसा है। संगठन ने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि छात्र और शिक्षक हितों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही संशोधित आदेश जारी किए जाएं, अन्यथा संगठन प्रदेश स्तर पर आंदोलन के लिए विवश होगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।

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