बीकानेर में फूटा जन-आक्रोश, धार्मिक स्थलों को तोड़े जाने के विरोध में उमड़ा हजारों का जनसैलाब
बीकानेर में फूटा जन-आक्रोश, धार्मिक स्थलों को तोड़े जाने के विरोध में उमड़ा हजारों का जनसैलाब


- बीकानेर कलेक्ट्री पर ऐतिहासिक महापड़ाव, 20 हजार लोगों की मौजूदगी में पूर्व मंत्री मेघवाल ने उठाए स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दे
बीकानेर, 1 जुलाई । राजस्थान के सरहदी जिले बीकानेर में धार्मिक स्थलों को तोड़े जाने के विरोध में जन-आक्रोश फूट पड़ा है। डॉ. आंबेडकर टाइगर फोर्स, संविधान न्याय सभा, किसान ब्रिगेड एवं संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस ऐतिहासिक महापड़ाव, सर्वधर्म सभा और आक्रोश रैली में बीकानेर शहर व ग्रामीण क्षेत्रों से सभी धर्मों के लगभग 20,000 लोगों का जनसैलाब उमड़ा। जिला कलेक्ट्री परिसर स्थित कर्मचारी मैदान में बिश्नोई धर्मशाला के सामने आयोजित इस महारैली में वक्ताओं ने सामाजिक सौहार्द की रक्षा और बिना कानूनी प्रक्रिया के की गई प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ एकजुटता प्रदर्शित की।


महापड़ाव को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री गोविंद राम मेघवाल ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर चौतरफा और तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि खाजूवाला क्षेत्र के बांडका, पहलवान का वैरा और आडूरी में बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के स्थानीय लोगों की आस्था से जुड़े धार्मिक स्थलों को ढहा दिया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है। उन्होंने इस कार्रवाई को दमनकारी बताते हुए स्थानीय सांसद और विधायक की चुप्पी पर भी तंज कसा।


अपने बिंदुवार संबोधन में पूर्व मंत्री ने न केवल स्थानीय बल्कि कई राष्ट्रीय मुद्दों पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। मेघवाल ने कर्ज माफी, किसानों की आय दोगुनी करने के वादों, महंगाई, और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा। उन्होंने नोटबंदी, जीएसटी की विसंगतियों और सरकारी उपक्रमों के निजीकरण का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश के प्रमुख संसाधन कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के हवाले किए जा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को केंद्रीय एजेंसियों के दम पर दबाने का प्रयास हो रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने पुलवामा हमले की संवेदनशीलता, मणिपुर की स्थिति, किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले 700 किसानों के मामले और देश की विदेश नीति की नाकामियों को लेकर भी अपनी बात रखी। मेघवाल ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में भारी वित्तीय अनियमितता और सोने-चांदी के गायब होने का बड़ा आरोप लगाते हुए इसकी जांच किसी सेवानिवृत्त जज या सीबीआई (CBI) से कराने की मांग की। उन्होंने बीकानेर जिले में स्थापित हो रही सोलर कंपनियों में स्थानीय नेताओं और प्रशासन की साठगांठ से चल रही कथित गुंडागर्दी का भी भंडाफोड़ किया।
इस विशाल जनसभा के समापन पर जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति और माननीय मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में प्रमुख रूप से ग्राम बांडका, पहलवान का वैरा और आडूरी के धार्मिक स्थलों का शासकीय खर्च पर ससम्मान पुनर्निर्माण कराने, सीमावर्ती क्षेत्रों में बिना नोटिस के ऐसी किसी भी कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाने और अयोध्या मंदिर की राशि की कथित लूट की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई है। इसके अलावा, बीकानेर जिले के सभी अनधिकृत धार्मिक स्थलों व वर्षों से बसे गरीब परिवारों को मालिकाना हक देने के लिए विशेष कैंप चलाकर पट्टे जारी करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
इस ऐतिहासिक महापड़ाव के मंच पर सद्दाम भाटी, पीर मकबूल शाह, रामकुमार तेतरवाल, मकसूद अहमद और रामधन मेघवाल सहित दर्जनों प्रमुख प्रबुद्ध जन और वक्ता मौजूद रहे। वहीं, आक्रोश कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न सरपंचों, ब्लॉक अध्यक्षों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसान नेताओं सहित हजारों नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर बीकानेर की गंगा-जमुनी तहजीब को अक्षुण्ण रखने का संकल्प लिया।


