अटारी में नाबार्ड प्रायोजित एलईडीपी डेयरी प्रशिक्षण के द्वितीय बैच का आगाज; 30 महिला किसान सीखेंगी वैज्ञानिक पशुपालन के गुर

अटारी में नाबार्ड प्रायोजित एलईडीपी डेयरी प्रशिक्षण के द्वितीय बैच का आगाज
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भरतपुर, 22 जून । जिले की अटारी ग्राम पंचायत में सोमवार को श्री गुरु जम्भेश्वर सेवा संस्थान द्वारा नाबार्ड प्रायोजित ‘आजीविका एवं उद्यम विकास कार्यक्रम’ (LEDP) के अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी प्रशिक्षण के द्वितीय बैच का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस ग्रामीण उद्यमिता कार्यक्रम में क्षेत्र की दुग्ध उत्पादन से जुड़ी महिला किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उद्घाटन सत्र के दौरान उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने प्रशिक्षणार्थी महिलाओं से सीधा संवाद कर उनका हौसला बढ़ाया।

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नाबार्ड प्रायोजित इस विशेष एलईडीपी कार्यक्रम के द्वितीय बैच में कुल 30 महिला पशुपालकों को शामिल किया गया है, जिन्हें 10 दिवसीय गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम का मूल उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को वैज्ञानिक पशुपालन तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को दुधारू पशुओं के उन्नत चयन, संतुलित आहार व पोषण प्रबंधन, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, पशु रोगों की समय पर पहचान व रोकथाम, अनिवार्य टीकाकरण तथा डेयरी को एक सुव्यवस्थित लाभप्रद बिजनेस मॉडल के रूप में संचालित करने की बारीकियाँ सिखाई जाएंगी। इसके साथ ही महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से सामूहिक कार्यप्रणाली, दुग्ध विपणन, बैंक ऋण-संबद्धता और वित्तीय साक्षरता से भी जोड़ा जाएगा ताकि प्रशिक्षण के बाद वे स्थायी आय-स्रोत विकसित कर सकें।

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अतिथियों ने बढ़ाया हौसला, दिया सहयोग का भरोसा
उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक सिद्धार्थ मिश्रा ने महिलाओं की आर्थिक प्रगति में बैंकिंग प्रणाली की भूमिका को रेखांकित करते हुए आश्वस्त किया कि बैंक उनके डेयरी उद्यमों को आगे बढ़ाने के लिए ऋण व वित्तीय सेवाओं के माध्यम से हरसंभव मदद करेगा। उन्होंने महिलाओं को समय पर ऋण-चुकौती कर बैंकिंग साख (क्रेडिट स्कोर) मजबूत करने की भी सलाह दी। वहीं, बैंक के शाखा प्रबंधक यतेन्द्र ने महिलाओं को बैंक खाता संचालन, बचत की आदतों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।

नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक शिवम अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि नाबार्ड का यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में सतत आजीविका के अवसर सृजित करने तथा महिलाओं को उद्यमिता की ओर अग्रसर करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। उन्होंने कहा कि यहाँ सीखी तकनीकों को व्यवहार में लाकर महिलाएं दूध की उत्पादकता और अपनी आय दोनों बढ़ा सकती हैं।

वर्ष 2007 से महिला सशक्तिकरण में जुटा है संस्थान
श्री गुरु जम्भेश्वर सेवा संस्थान के सचिव धर्मपाल ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि उनका संस्थान वर्ष 2007 से ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण एवं सामुदायिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि 10 दिन के इस प्रशिक्षण की समाप्ति के बाद भी संस्थान महिलाओं को तकनीकी मार्गदर्शन और अनुवर्ती (फॉलो-अप) सहयोग देता रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइज़ेशन (FPO) के अध्यक्ष ब्रजभूषण शर्मा ने भी महिलाओं को एफपीओ से जुड़ने के लाभ बताए ताकि उन्हें दुग्ध उत्पादों का बेहतर बाजार मूल्य मिल सके। प्रथम बैच की शानदार सफलता के बाद शुरू हुए इस द्वितीय बैच को लेकर ग्रामीण महिलाओं में भारी उत्साह देखा गया और उन्होंने उम्मीद जताई कि इस ज्ञान से वे अपने पारंपरिक पशुपालन को एक लाभकारी डेयरी बिजनेस में बदल सकेंगी।

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