जिनशासन की वाणी को जीवन में उतारना ही सच्ची साधना-साध्वी प्रीतिसुधा
जिनशासन की वाणी को जीवन में उतारना ही सच्ची साधना: साध्वी प्रीतिसुधा

- आयंबिल को बताया आत्मबल और आराधना का श्रेष्ठ अवसर; गुरु वल्लभ की 72वीं पुण्यतिथि पर आज होंगे विशेष आयोजन
बीकानेर, 05 अक्टूबर । रांगड़ी चौक स्थित पौषधशाला में चातुर्मास के दौरान आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वीश्री प्रीतिसुधा महाराज सा ने कहा कि जिनशासन अमृत का कुंड है, जबकि सांसारिक मोह-माया विष्ठा के कुंड के समान है। उन्होंने आचार्य हरिभद्रसूरिश्वरजी के भावों का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल जैन कुल में जन्म लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि हमारी जीवन-वृत्ति और आचरण भी जिनशासन की वाणी के अनुरूप होना चाहिए।


आयंबिल: आत्मबल और साधना का श्रेष्ठ मार्ग


आयंबिल आराधना के लिए श्रावक-श्राविकाओं को प्रेरित करते हुए साध्वीश्री ने कहा कि आयंबिल करना अमृत की धारा को स्पर्श करने जैसा है, जो शरीर के साथ-साथ मन और आत्मा को भी साधना की दिशा प्रदान करता है। उन्होंने भक्ति भाव को समझाते हुए कहा कि हमारी भक्ति का रंग ऐसा होना चाहिए, जो एक बार चढ़े तो कभी न उतरे। केवल शरीर का मंदिर में होना और मन का बाहर होना साधना के उद्देश्य को पूरा नहीं करता, धर्म को अपनी वृत्ति में उतारना आवश्यक है।
इलायची कुमार के प्रसंग से दिया आत्ममंथन का संदेश
साध्वीश्री ने इलायची कुमार का प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार युवावस्था में नटनी के प्रति आकर्षित हुए इलायची कुमार ने जब एक संयमी जैन साधु को गोचरी लेते हुए देखा, तो उनके भीतर गहरा आत्ममंथन शुरू हुआ। साधु के निष्काम संयम और स्वयं की आसक्ति की तुलना करते हुए उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ और इसी पश्चाताप से उन्होंने केवलज्ञान प्राप्त किया।
गुरु वल्लभ की 72वीं पुण्यतिथि पर 72 दीपकों से होगी महाआराधना
रांगड़ी चौक स्थित पदम प्रभु ट्रस्ट की पौषधशाला में मंगलवार को गुरु वल्लभ की 72वीं पुण्यतिथि श्रद्धा व गुरु गुणानुवाद के साथ मनाई जाएगी। चातुर्मास लाभार्थी परिवार के सुरेंद्र बद्धाणी ने बताया कि इस अवसर पर गुरु वल्लभ की प्रतिमा एवं चित्र के समक्ष 72 दीपक प्रज्वलित कर भक्ति गीतों के साथ आराधना की जाएगी। सोमवार को क्रमिक आयंबिल सुशीला कोचर ने किया, जबकि मंगलवार का आयंबिल अंजु कोचर करेंगी।
