साध्वी श्री उदित यशा जी ने स्वाध्याय दिवस पर ज्ञान की आराधना से आत्मकल्याण का संदेश दिया

साध्वी श्री उदित यशा जी ने स्वाध्याय दिवस पर ज्ञान की आराधना से आत्मकल्याण का संदेश दिया
क्विक जेप्स विज्ञापन 13 oct 2026

चेन्नई ,9 सितम्बर । पर्युषण महापर्व के अंतर्गत आयोजित ‘स्वाध्याय दिवस’ के अवसर पर साध्वी श्री उदित यशा जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्वाध्याय दिवस मूलतः ज्ञान की आराधना का पावन दिवस है। व्यक्ति अपने दैनिक सांसारिक कार्यों को निपटाते हुए भी ज्ञान की निरंतर आराधना कर सकता है, जो आत्मा को केवलज्ञान और अंततः मोक्ष की ओर ले जाती है।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

भगवान महावीर और ऋषभदेव के जीवन प्रसंगों से प्रेरणा
भगवान महावीर का आदर्श: साध्वी श्री उदित यशा जी ने बताया कि भगवान महावीर की जीवन-यात्रा अत्यंत कठोर, प्रेरक और आदर्शमय थी। उन्होंने निरंतर ज्ञान की आराधना और कठोर साधना के बल पर केवलज्ञान प्राप्त किया। स्वाध्याय केवल शास्त्रों को पढ़ना नहीं, बल्कि ज्ञान को आचरण में उतारना है।

pop ronak
bhikharam chandmal advertisment change 24 oct 2026

दान और भाव विशुद्धि: साध्वी श्री संगीत प्रभा जी ने भगवान ऋषभदेव के पूर्व भव का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब चित्त (मन), वित्त (धन) और पात्र तीनों की विशुद्धि होती है, तो उसका प्रभाव इतना अलौकिक होता है कि देवलोक का सिंहासन भी कम्पायमान हो जाता है।

पुस्तकालय और स्वाध्याय का महत्व
साध्वी श्री भव्य यशा जी ने स्वाध्याय दिवस के संदर्भ में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मन की वास्तविक शांति का सुगम मार्ग पुस्तकालय और स्वाध्याय है।

इस अवसर पर साध्वी श्री भव्य यशा जी एवं साध्वी श्री शिक्षा प्रभा जी ने पर्युषण पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए सुमधुर गीतिका का संगान किया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक भक्तिरस से सराबोर हो गया।

adv change on 24 oct 2026