आत्म-परमात्म का चिंतन-मनन करते हुए आत्म-कल्याण के लिए पुरुषार्थ करें- आचार्यश्री रामलालजी

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बीकानेर ,9 सितम्बर । अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ (हुक्म संघ) के नवम पट्टधर आचार्यश्री रामलालजी के पावन सान्निध्य में छबीली घाटी स्थित सेवा सदन में पर्युषण पर्व का दूसरा दिन अत्यंत आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। देश के विभिन्न हिस्सों से आए 600 से अधिक श्रद्धालुओं और स्थानीय सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने विशेष नियमों और संकल्पों के साथ जप, तप, स्वाध्याय, ध्यान और साधना की।

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आध्यात्मिक उद्बोधन और प्रेरणा
आचार्यश्री रामलालजी: उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन का हर पल बीत रहा है। पर्युषण पर्व आत्मा के वास्तविक स्वरूप को जगाने और स्वयं को जानने का अलौकिक अवसर है। मनुष्य को कषायों से मुक्त होकर आत्म-चिंतन और आत्म-कल्याण की सच्ची कमाई करनी चाहिए।

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उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि: उन्होंने बताया कि गुरु और परमात्मा के सच्चे भाव से दर्शन और वंदन करने से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है, जिससे व्यक्ति का भाग्य और भव बदल जाता है।

लाघव मुनि: उन्होंने चरम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी और संघ की पाटानुपाट परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने 74वें पट्टधर आचार्यश्री हुकमीचंद म.सा. के 1907 में हुए ऐतिहासिक बीकानेर प्रवास और मुनि शिवलालजी म.सा. को उत्तरदायित्व सौंपने के ऐतिहासिक प्रसंग को याद दिलाया।

अन्य संतों के विचार: मधुर मुनि ने ‘अंतगढ़ दशा सूत्र’ का विवेचन किया, जबकि साध्वीश्री सुमेरू श्रीजी ने आत्मावलोकन का संदेश दिया।

श्रावक-श्राविकाओं की साधना एवं पचखान से निर्वाण

श्री साधुमार्गी सेवा समिति के अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद, मंत्री सुरेश बछावत और अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा ने बताया कि श्रद्धालु ज्ञान, दर्शन और चारित्र की अभिवृद्धि के लिए विविध अनुष्ठान कर रहे हैं।

ज्ञान और दर्शन साधना: जैन सिद्धांत बतीसी, 100 गाथा, अंतगढ़ सूत्र के पठन के साथ ‘अर्ह’, 27 नमोत्थुणं, ‘जय गुरु राम’ और नवकार महामंत्र का नियमित जाप किया जा रहा है।

तप और आचरण: प्रतिदिन नौ सामायिक, रामामृत ध्यान, प्रतिक्रमण, रात्रि चौविहार, दया, बयासना, तेला और 9 दिवसीय विशेष तपस्याएं की जा रही हैं। श्रद्धालु ‘पचखान से निर्वाण’ के तहत 200 नियमों का पालन कर रहे हैं।

आलोचना-एक कदम मोक्ष की ओर’ शिविर का आयोजन

मीडिया प्रभारी अमित गोलछा ने बताया कि सेवा सदन में 15 सितम्बर तक दोपहर 3:15 बजे से ‘आलोचना-एक कदम मोक्ष की ओर’ शिविर का संचालन किया जा रहा है। इसमें श्रद्धालु इंद्रिय विषय पचखाण और रस परित्याग जैसे विषयों पर साधु-साध्वीवृंद से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान कर रहे हैं। बुधवार को वेदनीय कर्म पर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिताएं 15 सितम्बर तक निरंतर चलेंगी, जिनमें विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

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