राजराजेश्वरी नगर में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का द्वितीय दिवस ‘स्वाध्याय दिवस

राजराजेश्वरी नगर में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का द्वितीय दिवस ‘स्वाध्याय दिवस
STBA 5 JUNE 2026
quicjZaps 15 sept 2025

राजराजेश्वरी नगर ,9 सितंबर । पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का द्वितीय दिवस ‘स्वाध्याय दिवस’ के रूप में अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और अध्यात्मभाव के साथ मनाया गया। प्रथम दिन के सफल आयोजन के पश्चात् संघ भवन में श्रद्धालुओं का विशेष उत्साह देखने को मिला।

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संतों का पावन सान्निध्य और प्रेरणादायी उद्बोधन

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मुनि आकाश कुमार जी: उन्होंने स्वाध्याय की गूढ़ व्याख्या करते हुए कहा कि ‘स्व’ का अर्थ है स्वयं और ‘अध्याय’ का अर्थ है अध्ययन—अर्थात स्वयं का अवलोकन ही वास्तविक स्वाध्याय है। यह केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न होकर अपने विचारों, व्यवहार और जीवनशैली के आत्मनिरीक्षण का माध्यम है। उन्होंने भगवान ऋषभदेव की दीक्षा, भरत-बाहुबली के युद्ध व शांति-स्थापना तथा विद्याधर वंश की उत्पत्ति के प्रेरणादायी प्रसंगों का वर्णन किया।

मुनि हितेन्द्र कुमार जी: उन्होंने तेरापंथ प्रथम पट्टधर आचार्य भिक्षु के उत्तराधिकारी आचार्य भारमल जी के जीवन-चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आचार्य भारमल जी ने आचार्य भिक्षु की आज्ञाओं को बिना किसी तर्क के सहजता से स्वीकार किया। मेवाड़ के महाराणा भी उन्हें गुरु रूप में पूजते थे। इस दौरान उन्होंने केसर भंडारी जी की अनुकरणीय सेवा-भावना का भी उल्लेख किया।

महिला मंडल और श्रावक-श्राविकाओं का योगदान
महिला मंडल की अध्यक्षा मंजू देवी बोथरा ने स्वाध्याय को आत्मजागृति और विवेक का आधार बताते हुए नियमित स्वाध्याय की प्रेरणा दी। इस अवसर पर महिला मंडल की बहनों द्वारा भावपूर्ण जैन गीतिका का संगान किया गया।

पर्युषण पर्व के दौरान सभा भवन में श्रद्धालुओं के आवास एवं शुद्ध खान-पान की सुचारू व्यवस्थाएं की गई हैं। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं जप, तप, त्याग और स्वाध्याय के जरिए आत्मशुद्धि में लीन हैं।