अंतरराष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर डॉ. शंकरलाल स्वामी की यात्रा वृत्तांत पुस्तक “धर्मक्षेत्रे-कर्मक्षेत्रे” पर पुस्तक चर्चा आयोजित
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर डॉ. शंकरलाल स्वामी की यात्रा वृत्तांत पुस्तक "धर्मक्षेत्रे-कर्मक्षेत्रे" पर पुस्तक चर्चा आयोजित



- वक्ताओं ने पर्यटन को बताया आर्थिक व सांस्कृतिक विकास का आधार
बीकानेर, 27 सितम्बर । नत्थूसर बास स्थित स्वामी सदन में राजस्थान साहित्य चेतना मंच के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार व चिकित्सक डॉ. शंकरलाल स्वामी की यात्रा वृत्तांत पुस्तक “धर्मक्षेत्रे-कर्मक्षेत्रे” पर एक गरिमामय पुस्तक चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्रिंसिपल, चिंतक व लेखक प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी ने की। मुख्य अतिथि राजस्थान साहित्य चेतना मंच के संस्थापक व अध्यक्ष वरिष्ठ कवि जुगल किशोर पुरोहित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में लेखक-कथाकार उमाशंकर बागड़ी मौजूद रहे। पुस्तक चर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार व कवि डॉ. जगदीश दान बारहठ और शिक्षाविद डॉ. कृष्णा गहलोत ने अपने विचार रखे।


अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. डॉ. नरसिंह बिनानी ने कहा कि पर्यटन उद्योग देश के आर्थिक विकास को गति देने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो युवाओं को स्वरोजगार व रोजगार के अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि डॉ. स्वामी की यह पुस्तक देश के विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के यात्रा संस्मरणों को सजीवता से प्रस्तुत करती है, जिससे पाठकों और युवाओं के ज्ञान, मनोरंजन व मानसिक संतोष में वृद्धि होती है।
मुख्य अतिथि जुगल किशोर पुरोहित ने कहा कि पुस्तक “धर्मक्षेत्रे-कर्मक्षेत्रे” धर्म, कर्म और भारतीय संस्कृति के पावन तीर्थों का उल्लेख करते हुए तीर्थयात्रा के पौराणिक व आध्यात्मिक महत्व को खूबसूरती से उजागर करती है।
लेखक डॉ. शंकरलाल स्वामी ने अपनी कृति की विषय-सामग्री का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह उनके यात्रा संस्मरणों की तीसरी पुस्तक है। इसमें उत्तराखंड के चार धामों (केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री), हिमाचल प्रदेश के शक्तिपीठों (ज्वालामुखी, नैनादेवी, चामुंडा देवी), जम्मू-कश्मीर, वैष्णो देवी, कुल्लू-मनाली, रोहतांग, एलोरा, श्रीरंगम और कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण के समय की यात्रा के अनुभवों को शामिल किया गया है। यह पुस्तक पर्यटकों के लिए एक मार्गदर्शिका के रूप में भी उपयोगी सिद्ध होगी।
विशिष्ट अतिथि उमाशंकर बागड़ी ने पर्यटन को जीवन की नीरसता दूर करने और बाह्य दुनिया का ज्ञान प्राप्त करने का सशक्त माध्यम बताया। मुख्य वक्ता डॉ. जगदीश दान बारहठ ने प्राचीन ग्रंथों में देशाटन की परंपरा का उल्लेख करते हुए पुस्तक को सराहनीय बताया। वहीं, शिक्षाविद डॉ. कृष्णा गहलोत ने पर्यटन को अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार ‘लोकल फॉर वोकल’ की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण करार दिया।
कार्यक्रम में इं. भानेश्वर स्वामी, सुनीता देवी, विशाल स्वामी, कोमल स्वामी, वैभव, दिनेश वैष्णव, राधा स्वामी, दिव्या कुमारी तथा अहमदाबाद व जयपुर से जुड़े प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन नीट छात्रा खुशी वैष्णव ने किया और आभार कुमारी दिव्या वैष्णव ने व्यक्त किया।
