ऊन उद्योग के अपशिष्ट जल प्रबंधन और जेडएलडी तकनीक पर हुई चर्चा
ऊन उद्योग के अपशिष्ट जल प्रबंधन और जेडएलडी तकनीक पर हुई चर्चा



- ईसीबी में “वूल वेस्टवॉटर टू वेल्थ” कार्यशाला आयोजित
बीकानेर, 27 सितम्बर । पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख ऊन उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट जल को पर्यावरणीय चुनौती के बजाय उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में अभियांत्रिकी महाविद्यालय (ईसीबी), बीकानेर ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। ‘विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस’ के अवसर पर ईसीबी की जेडएलडी (ZLD) लैब में “जेडएलडी लैब – वूल वेस्टवॉटर टू वेल्थ” विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।


ग्रीन केमिस्ट्री एंड एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी सेल (GCEASC) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के संयोजक डॉ. प्रवीण राजपुरोहित रहे, जबकि मंच संचालन रवि शंकर भोभिया ने किया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने ऊन प्रसंस्करण के दौरान उत्पन्न अपशिष्ट जल के वैज्ञानिक उपचार और ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ (Zero Liquid Discharge – ZLD) तकनीक के माध्यम से जल के पुनः उपयोग व ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की संभावनाओं पर गहन मंथन किया। बीकानेर जैसे प्रमुख ऊन औद्योगिक क्षेत्र के लिए इस तकनीक को स्थानीय स्तर पर अत्यंत उपयोगी बताया गया।


ईसीबी के प्राचार्य डॉ. संजीव जैन ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण स्वास्थ्य केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित न होकर सतत विकास से जुड़ा व्यापक विषय है। ऐसे तकनीकी प्रयास विद्यार्थियों को वास्तविक पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान से जोड़ने का कार्य करेंगे। कुलसचिव अमित सोनी ने जेडएलडी लैब की पहल की सराहना करते हुए औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन हेतु तकनीकी संस्थानों और उद्योगों के बीच नवाचारों को बढ़ावा देने पर बल दिया।
कार्यक्रम में ईसीबी तथा बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय (BTU) के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों ने भाग लिया। इस दौरान जल पुनर्चक्रण तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया।
