बीकानेर में उच्च न्यायालय की स्थाई खंडपीठ की स्थापना हेतु बार एसोसिएशन ने सौंपा 198वां ज्ञापन
बीकानेर में उच्च न्यायालय की स्थाई खंडपीठ की स्थापना हेतु बार एसोसिएशन ने सौंपा 198वां ज्ञापन



- पुराने कोर्ट परिसर की समस्याओं पर भी जताई चिंता
बीकानेर, 18 जून। बीकानेर संभाग मुख्यालय पर राजस्थान उच्च न्यायालय की स्थाई खंडपीठ (बेंच) स्थापित करने की ऐतिहासिक और लंबे समय से लंबित मांग को लेकर बार एसोसिएशन, बीकानेर ने अपना संघर्ष तेज कर दिया है। इसी कड़ी में एसोसिएशन द्वारा आज महामहिम राज्यपाल के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से तथा मुख्य न्यायाधिपति, राजस्थान उच्च न्यायालय के नाम जिला एवं सत्र न्यायाधीश के माध्यम से रिकॉर्ड 198वां ज्ञापन प्रेषित किया गया।


बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय कुमार पुरोहित ने बीकानेर के गौरवमयी न्यायिक इतिहास को रेखांकित करते हुए बताया कि रियासत काल में वर्ष 1922 से 1949 तक बीकानेर में खुद का उच्च न्यायालय स्थापित था, जिसका भव्य ऐतिहासिक भवन आज भी शहर में सीना ताने खड़ा है। वर्तमान में बीकानेर संभाग के चारों जिले मरुस्थलीय होने के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े हुए हैं। ऐसे में सुदूर क्षेत्रों के निर्धन व आम नागरिकों को न्याय पाने के लिए सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर जोधपुर जाना पड़ता है, जिससे उन पर अत्यधिक आर्थिक व मानसिक बोझ पड़ता है और सुलभ न्याय की संवैधानिक अवधारणा प्रभावित होती है।


देश के बड़े राज्यों में एक से अधिक खंडपीठ, तो राजस्थान में क्यों नहीं ?
ज्ञापन में देश के अन्य भौगोलिक व प्रशासनिक ढांचों का हवाला देते हुए बताया गया कि क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान देश के सबसे बड़े राज्यों में शुमार है, जबकि तुलनात्मक रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सुचारू न्यायिक व्यवस्था के लिए एक से अधिक उच्च न्यायालय खंडपीठें सफलतापूर्वक संचालित हैं।
विधिक मांग: बार एसोसिएशन ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 51(3) के वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत बीकानेर संभाग मुख्यालय पर राजस्थान उच्च न्यायालय की स्थाई खंडपीठ स्थापित किए जाने की मांग को पुरजोर तरीके से दोहराया है।
लंबित प्रकरण: बीकानेर संभाग से जुड़े हजारों महत्वपूर्ण वाद वर्तमान में जोधपुर उच्च न्यायालय में लंबित हैं, जिसके निवारण के लिए क्षेत्र की जनता और अधिवक्ता पिछले कई दशकों से इस मांग पर अड़े हैं।
पुराने न्यायालय परिसर में सीवरेज जाम और गंदगी का मुद्दा भी गूंजा
खंडपीठ की मुख्य मांग के साथ-साथ बार एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने पुराने न्यायालय परिसर में व्याप्त गंभीर स्वच्छता और सीवरेज संबंधी जनसमस्याओं को जिला कलेक्टर के समक्ष प्रमुखता से उठाया। वकीलों ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) पी.पी. शाखा के समीप मुख्य सीवरेज लाइन लंबे समय से जाम पड़ी है, जिससे गंदा और दूषित पानी निरंतर पुराने न्यायालय परिसर के भीतर प्रवेश कर रहा है। इसके चलते परिसर में भारी दुर्गंध, जलभराव और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे महामारी फैलने का अंदेशा है।
अधिवक्ताओं ने चिंता जताई कि आगामी वर्षा ऋतु में यह स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है, जिससे वहां आने वाले पक्षकारों, मुवक्किलों और महिला स्टाफ को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। वर्तमान में इस पुराने परिसर में चार महत्वपूर्ण न्यायालय संचालित हो रहे हैं, इसके बावजूद वहां स्थित सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई और आवश्यक मरम्मत नहीं हो रही है। इस पर जिला कलेक्टर ने तुरंत संज्ञान लेते हुए नगर निगम आयुक्त को मौके का निरीक्षण कर समस्या के स्थाई समाधान के कड़े निर्देश दिए।
आरटीओ (RTO) कार्यालय का बंद द्वार खोलने और वकीलों के बैठने की मांग
प्रशासन ने दिया त्वरित समाधान का आश्वासन: बार एसोसिएशन ने जिला परिवहन कार्यालय (RTO) परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार को लंबे समय से बंद रखे जाने का मुद्दा भी तार्किक ढंग से जिला कलेक्टर के सामने रखा। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस महत्वपूर्ण द्वार के बंद होने से अधिवक्ताओं, परिवहन संबंधी कार्य से आने वाले पक्षकारों और आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से लंबा चक्कर काटना पड़ता है। साथ ही आरटीओ कार्यालय में अधिवक्ताओं के बैठने के लिए कोई समुचित शेड या बैठने की व्यवस्था नहीं है। इन सभी प्रशासनिक व ढांचागत विषयों पर जिला कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों से त्वरित चर्चा कर नियमानुसार आवश्यक समाधान करवाने का पूरा भरोसा दिलाया।
समारोह और ज्ञापन सौंपने के दौरान बार एसोसिएशन, बीकानेर के अध्यक्ष अजय कुमार पुरोहित, सचिव हेमंत सिंह चौहान, उपाध्यक्ष मनीष गौड़, लेखराम धत्तरवाल, ओमप्रकाश हर्ष, सुरेंद्र पाल शर्मा, कुंदन व्यास, बजरंग छींपा, मनीराम विश्नोई, नवनीत नारायण व्यास, सुखदेव व्यास, लाल चंद सुथार, भंवर जांगल, शिव कुमार मेघवाल, हंसराज चौधरी, चतुर्भुज सारस्वत, रामदेव सारस्वत, सुरेश नारायण पुरोहित, केशव व्यास, नवाज खान, रामकिशन, पवन कुमार व्यास, रामनिवास विश्नोई, प्रशांत तंवर और ताराचंद उपाध्याय सहित भारी संख्या में वरिष्ठ व युवा अधिवक्तागण उपस्थित रहे।


