KGF में ज्ञानशाला वार्षिकोत्सव में बच्चों ने रोबोटिक प्रस्तुति से समझाया कर्म का सिद्धांत, साध्वी श्री ने दी मोबाइल से दूरी की प्रेरणा

KGF में ज्ञानशाला वार्षिकोत्सव में बच्चों ने रोबोटिक प्रस्तुति से समझाया कर्म का सिद्धांत, साध्वी श्री ने दी मोबाइल से दूरी की प्रेरणा
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कोलार गोल्ड फील्ड्स (KGF), कर्नाटक, 9 जून । श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री संयमलता जी ‘ठाणा-4’ के पावन सान्निध्य में रविवार को स्थानीय तेरापंथ सभा भवन में ‘ज्ञानशाला वार्षिकोत्सव’ का हर्षोल्लास के साथ आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बच्चों में धार्मिक संस्कारों के बीजारोपण और उनकी प्रतिभा को निखारने के एक सशक्त मंच के रूप में उभरा।

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कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ ज्ञानशाला की समर्पित प्रशिक्षिकाओं द्वारा सुमधुर मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात नन्हे-मुन्ने ज्ञानार्थियों ने ‘अर्हम अर्हम की वन्दना फले…’ ज्ञानशाला गीत की सामूहिक प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

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संस्कार ही जीवन की वास्तविक पूंजी: साध्वी संयमलता जी

मुख्य प्रवचन सत्र में साध्वी श्री संयमलता जी ने ज्ञानशाला के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “गणाधिपति आचार्य तुलसी द्वारा प्रारंभ किया गया यह महान उपक्रम ‘ज्ञानशाला’ वास्तव में संस्कारों की वह फुलवारी है, जो हमारे समाज और राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य तैयार करती है।” उन्होंने संस्कारों को सफलता की चाबी बताते हुए कहा कि जिस प्रकार शरीर के विकास के लिए विटामिन और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार एक श्रेष्ठ नागरिक बनने के लिए बच्चों को विनम्रता का विटामिन, अनुशासन का ओज और सहनशीलता का सिरप दिया जाना अनिवार्य है।

सांस्कृतिक शुद्धि हेतु दिलाए महत्वपूर्ण संकल्प

आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में उतारने के उद्देश्य से साध्वी श्री ने बच्चों को विशेष सत्-संकल्प दिलाए। उन्होंने ज्ञानार्थियों को प्रेरित किया कि जहां शाकाहार और मांसाहार भोजन एक साथ बनता व परोसा जाता हो, वहां भोजन करने से बचें। साथ ही, हमारी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए वर्तमान पीढ़ी को मोबाइल और टीवी के अत्यधिक उपयोग से बचने की नसीहत दी। साध्वी श्री रौनकप्रभा जी के अथक मार्गदर्शन में बच्चों ने विभिन्न प्रस्तुतियों का कड़ा अभ्यास किया।

रोबोटिक प्रस्तुति और ‘मस्ती की पाठशाला’ ने मोहा मन

वार्षिकोत्सव के दौरान ज्ञानार्थियों ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए ‘कर्म सिद्धांत’ (Theory of Karma) पर आधारित एक विशेष रोबोटिक प्रस्तुति दी। इस दौरान ‘गति से अधिक दिशा महत्वपूर्ण है’ (Direction is more important than speed) का प्रभावी संदेश दिया गया। इसके अलावा ‘मस्ती की पाठशाला’, नमस्कार मुद्रा और ‘शनिवार सामायिक’ की महत्ता पर आधारित लघु नाटिकाओं ने उपस्थित श्रावक-श्राविका समाज को मंत्रमुग्ध कर दिया।

प्रतिभाओं और प्रशिक्षिकाओं का सम्मान

बच्चों के उत्साहवर्धन के लिए प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें रित्विक बांठिया और धृति बांठिया ने प्रथम तथा धानी हिंगड ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। सभी प्रतिभागी बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। समारोह में ज्ञानशाला की उन प्रशिक्षिका बहनों की भी सराहना की गई, जो अपना कीमती समय और श्रम नियोजित कर बच्चों को सुसंस्कारित कर रही हैं। कार्यक्रम का कुशल संचालन कमलेश जी हिंगड ने किया।

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