शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ ने निदेशक को सौंपे चार ज्ञापन, पदोन्नति और पदस्थापन की मांग

शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ ने निदेशक को सौंपे चार ज्ञापन, पदोन्नति और पदस्थापन की मांग
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  • समय पर कार्यवाही न होने पर धरना प्रदर्शन की दी चेतावनी, प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने की वार्ता
  • 2026-27 की डीपीसी समय पर करवाने और सहायक कर्मचारियों के पदस्थापन आदेश जारी करने पर जोर

बीकानेर, 25 मई। शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ राजस्थान, बीकानेर के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने सोमवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशक श्री सीताराम जाट (IAS) से मुलाकात कर कर्मचारियों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं के समाधान हेतु चार महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपे। इस दौरान संगठन और निदेशालय के बीच सकारात्मक वार्ता हुई, जिसमें कार्मिकों के हितों को लेकर पुरजोर मांग रखी गई।

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इन प्रमुख मांगों को लेकर सौंपे गए ज्ञापन
प्रदेशाध्यक्ष आचार्य द्वारा माननीय शिक्षा मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं शिक्षा निदेशक को ईमेल के माध्यम से प्रेषित ज्ञापनों में निम्नलिखित मांगें उठाई गई हैं:

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पदोन्नत कर्मचारियों का पदस्थापन: सहायक कर्मचारी से अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर की गई पदोन्नति के पश्चात उनके पदस्थापन आदेश अविलम्ब जारी किए जाएं।

संभाग स्तरीय पदोन्नति: जयपुर और बीकानेर संभाग में कनिष्ठ सहायकों से वरिष्ठ सहायक के पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जाए।

वरिष्ठता का लाभ: आरपीएससी (RPSC) से चयनित वर्ष 1986 के कार्मिकों को वरिष्ठता का लाभ देते हुए उनकी पदोन्नति सुनिश्चित की जाए। आचार्य ने इस बात पर रोष व्यक्त किया कि सीनियर होने के बावजूद कई कार्मिकों को छोड़कर जूनियरों को पदोन्नति दी गई है, जिसे दुरुस्त किया जाए।

समयबद्ध डीपीसी: आगामी सत्र 2026-27 के लिए संस्थापन अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी की डीपीसी (DPC) जून और जुलाई माह में ही संपन्न करवाई जाए।

निदेशक के साथ वार्ता और संगठन का कड़ा रुख
वार्ता के दौरान कमल नारायण आचार्य ने निदेशक को स्पष्ट किया कि इन चारों ज्ञापनों पर समय रहते कार्यवाही की जाए ताकि प्रदेश भर के शिक्षा विभागीय कर्मचारियों को मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

चेतावनी: संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि इन मांगों पर अविलम्ब सकारात्मक कार्यवाही नहीं होती है, तो संघ निदेशालय के समक्ष धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होगा। इसकी समस्त जिम्मेदारी शिक्षा प्रशासन की होगी।

इस अवसर पर संगठन के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कर्मचारियों के समय पर पदोन्नति परिलाभ मिलने को उनका संवैधानिक अधिकार बताया।

 

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