नोखा गांव के इतिहास में पहली बार वैराग्य का ऐसा अनूठा रूप, चेन्नई की भाविका और एकता बनीं जैन साध्वी
चेन्नई की भाविका और एकता बनीं जैन साध्वी



नोखा (बीकानेर), 23 जून । नोखागांव के जैन समाज के इतिहास में सोमवार को एक अत्यंत अनूठा और भावनात्मक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। यहाँ आयोजित एक भव्य धार्मिक समारोह में चेन्नई निवासी दो सगी बहनों ने भागवती जैन दीक्षा ग्रहण कर सांसारिक जीवन और भौतिक सुख-सुविधाओं का पूरी तरह से त्याग कर दिया। यह दीक्षा संस्कार साधुमार्गी जैन संघ के युगप्रधान आचार्य रामेश तथा उपाध्याय प्रवर राजेशमुनि महाराज साहब के पावन सान्निध्य में पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। संयम, तप और साधना के मार्ग पर अग्रसर होने वाली इन दो सगी बहनों में 22 वर्षीय भाविका झांबर और उनकी छोटी बहन 20 वर्षीय एकता झांबर शामिल हैं।


दीक्षा महोत्सव का शुभारंभ गंगाराम लूणावत के निवास स्थान पर मुंडन संस्कार के साथ हुआ, जिसके पश्चात एक भव्य ‘महाअभिनिष्क्रमण यात्रा’ (वरघोड़ा) निकाली गई। इस शोभायात्रा में देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं और स्थानीय धर्मप्रेमियों का हुजूम उमड़ पड़ा। भव्य अभिनिष्क्रमण यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई समता भवन पहुंची, जहां विशाल धर्मसभा के बीच मुख्य दीक्षा संस्कार की प्रक्रिया शुरू की गई। उपाध्याय प्रवर राजेशमुनि महाराज साहब ने संपूर्ण दीक्षा विधि को कुशलतापूर्वक संपन्न कराया। इस दौरान परम पूज्य आचार्य रामेश जी ने दोनों मुमुक्षु बहनों को ‘करेमी भंते’ का पाठ करवाकर जीवनभर के लिए समस्त सावद्य योगों (सांसारिक गतिविधियों) का त्याग कराया और उन्हें नवकार मंत्र के पांचवें पद ‘णमो लोए सव्वसाहूणं’ पर आरूढ़ किया। शासन दीपिका साध्वी सुमेरु श्री महाराज साहब ने नवदीक्षित साध्वियों के केशलोचन की प्रकिया पूरी करवाई।


दीक्षा के बाद ‘साध्वी रामभाविका श्री जी’ और ‘साध्वी रामेषी श्री जी’ बने नए नाम
दीक्षा संस्कार पूर्ण होने के पश्चात पूज्य आचार्यों द्वारा दोनों बहनों के नए दीक्षा नामों की घोषणा की गई, जिससे पूरा समता भवन पांडाल गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। बड़ी बहन भाविका झांबर को अब अध्यात्म जगत में “साध्वी रामभाविका श्री जी” तथा छोटी बहन एकता झांबर को “साध्वी रामेषी श्री जी” के नए नाम से जाना जाएगा।
संयम ही आत्मकल्याण और मोक्ष का सच्चा मार्ग: आचार्य रामेश
विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए युगप्रधान आचार्य रामेश ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि भौतिक संसार क्षणभंगुर है और संयम ही आत्मा की वास्तविक पुकार तथा मोक्ष व आत्मकल्याण का एकमात्र सच्चा मार्ग है। वहीं उपाध्याय प्रवर राजेशमुनि, संत मधुरमुनि एवं गगनमुनि महाराज साहब ने भी संयम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि परिवार में किसी भी सदस्य के मन में वैराग्य और दीक्षा के भाव उत्पन्न हों, तो परिजनों को सांसारिक मोह में आकर उनके मार्ग को बाधित नहीं करना चाहिए, बल्कि सहर्ष अनुमति देनी चाहिए।
आचार्य श्री के सान्निध्य में अब तक हो चुकी हैं 490 दीक्षाएं
साधुमार्गी जैन संघ नोखा के अध्यक्ष गंगाराम लूणावत, संघ मंत्री महावीर सुराणा और संघ प्रचारक महेश नाहटा ने संयुक्त रूप से बताया कि आचार्य श्री रामेश के युवाचार्य पद पर आसीन होने के बाद से लेकर अब तक उनके शासनकाल में कुल 490 भागवती दीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं। इस ऐतिहासिक प्रसंग के साक्षी बनने के लिए देशभर के कोने-कोने से हजारों की संख्या में जैन समाज के लोग नोखा पहुंचे थे। समारोह में नरेंद्र गांधी, ललित झांबर, शोभा झांबर, उत्तम लूणावत, मेघसिंह राठौड़ और मुरली गोदारा सहित अनेक राजनैतिक, सामाजिक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


