जोधपुर में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 8 महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, 2 की हालत गंभीर

जोधपुर में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 8 महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, 2 की हालत गंभीर
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quicjZaps 15 sept 2025
STBA 5 JUNE 2026
  • कोटा-बीकानेर के बाद अब जोधपुर अस्पताल में भी ‘किडनी इन्फेक्शन’ का खौफ, पावटा जिला अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर सीज; एमडीएम अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर पर दो प्रसूताएं

जोधपुर, 23 जून । राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी (ऑपरेशन से प्रसव) के बाद प्रसूताओं की किडनी फेल होने और गंभीर इन्फेक्शन होने का जानलेवा सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कोटा और बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के गंभीर मामलों के बाद अब जोधपुर से भी ऐसी ही डराने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के पावटा स्थित जिला अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद अचानक 8 महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई। इनमें से 2 प्रसूताओं की हालत अत्यधिक चिंताजनक होने पर उन्हें तुरंत मथुरादास माथुर (MDM) अस्पताल के आईसीयू (ICU) में रेफर किया गया है, जहाँ वे जीवन और मौत के बीच जूझ रही हैं। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश के चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया है।

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मिली जानकारी के अनुसार, पावटा जिला अस्पताल में पिछले कुछ दिनों के भीतर इन महिलाओं के सिजेरियन ऑपरेशन किए गए थे। प्रसव के बाद अचानक सभी महिलाओं को तेज बुखार, उल्टी और यूरिन आउटपुट (पेशाब) कम होने जैसी गंभीर शिकायतें होने लगीं। जांच में सामने आया कि महिलाओं की किडनियों में गंभीर संक्रमण (Severe Kidney Infection) फैल चुका है। 2 महिलाओं की स्थिति क्रिटिकल होने के कारण उन्हें उच्च स्तरीय इलाज के लिए एमडीएम अस्पताल स्थानांतरित किया गया, जबकि शेष 6 प्रसूताओं की हालत पर भी डॉक्टरों की विशेष टीम नजर बनाए हुए है।

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दूषित दवा या ऑपरेशन थिएटर में घातक बैक्टीरिया का अंदेशा, जांच के आदेश
जोधपुर में एक साथ इतनी प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी तुरंत हरकत में आए। प्रारंभिक तौर पर अंदेशा जताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल की गई एनेस्थीसिया या एंटीबायोटिक दवाएं दूषित (नकली/अमानक) हो सकती हैं, अथवा अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) में कोई घातक बैक्टीरियल संक्रमण फैला हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। डॉक्टरों की एक विशेष तकनीकी टीम पावटा अस्पताल के ओटी से सैंपल्स ले रही है और दवाओं के स्टॉक को सीज कर जांच के लिए भेजा जा रहा है।

हॉस्पिटल के PMO डॉक्टर कुलबीर चोपड़ा ने बताया- सरकार ने जांच कमेटी गठित की है। इसमें डॉक्टर्स और ड्रग इंस्पेक्टर सहित अन्य लोग शामिल हैं। यह कमेटी सैंपल्स की जांच कर रही है। वहीं, सिजेरियन प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल की गई दवाओं पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है।इधर, देर रात डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज की ओर से सभी 8 प्रसूताओं की हेल्थ डिटेल्स को शेयर किया गया। बताया गया कि पावटा हॉस्पिटल में एडमिट 6 प्रसूताओं की हालत में सुधार है। बाकी दो का इलाज एम्स में चल रहा है।

मंत्री बोले- हमारे पास ज्यादातर इमरजेंसी और बिगड़े केस आते हैं चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा- बीकानेर के मामलों को कोटा से नहीं जोड़ा जा सकता है। हमारे अस्पतालों (गवर्नमेंट हॉस्पिटल) में ज्यादातर इमरजेंसी और रेफर किए गए गंभीर केस आते हैं। पूरी तरह बिगड़े हुए केस आते हैं। हमारे यहां सीधे आने वाले फ्रेश केस बहुत कम होते हैं। मरीज कहीं न कहीं से धक्का खाकर हमारे पास आते हैं। जब प्राइवेट हॉस्पिटल वाले बोल देते हैं कि इतने लाख रुपए लगेंगे या जब वे हाथ खड़े कर लेते हैं, तो फिर मरीज कहां जाएगा? आखिर में वे मरीज हमारे सरकारी अस्पतालों में ही आते हैं। उन्होंने बताया- पावटा अस्पताल में भर्ती 6 प्रसूताएं बिल्कुल स्वस्थ हैं। वहीं 2 मरीजों का हायर सेंटर में इलाज चल रहा है। मंत्री ने कहा- सीजेरियन में ब्लीडिंग होती है। आज 50% लेडीज सीजेरियन चाहती हैं, वे दर्द नहीं चाहती।

जोधपुर में प्रसूताओं को डिलीवरी के समय लगाए गए ड्रिप सहित 25 तरह की दवा और इंजेक्शन के यूज पर रोक लगा दी गई है। इन सभी के सैंपल लिए गए हैं। जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक इन्हें यूज नहीं किया जाएगा। बताया जा रहा है कि सिजेरियन डिलीवरी के समय प्रसूताओं को सोडियम लैक्टेट इंजेक्शन (ड्रिप) लगाया गया था। 7 दिन पहले ही इसका पहला बैच आया था और पहली बार इसे यूज किया गया था। मेडिकल डिपार्टमेंट ने अब इन्हें संदिग्ध माना है। ऐसे में प्रसूताओं की तबीयत खराब होने के बाद इन सभी पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। वहीं मामले को लेकर एम्स की टीम भी जांच करेगी। बता दें कि सिजेरियन डिलीवरी के बाद 8 प्रसूताओं की 20 जून को तबीयत खराब हो गई थी।

सात दिन पहले आया था पहला बैच

पावटा डिस्ट्रीक्ट हॉस्पिटल के पीएमओ डॉ. कुलबीर चौपड़ा ने बताया- ये ड्रिप प्री-सिजेरियन और पोस्ट सिजेरियन दोनों कंडीशन में दी जाती है। इस बैच की सप्लाई सात दिन पहले ही हुई थी। इसके बाद पहली बार शनिवार को 8 प्रसूताओं को ये दिया गया था। चौपड़ा ने बताया- बाकी मेडिसिन और ट्रीटमेंट जो पहले दिया जा रहा था, वह ही था।

कोटा और बीकानेर के बाद तीसरी बड़ी घटना; चिकित्सा व्यवस्था पर उठे सवाल
गौरतलब है कि पिछले दिनों कोटा और बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भी सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई प्रसूताओं की किडनियां फेल होने के मामले सामने आए थे, जिनमें बीकानेर में अब तक दो प्रसूताओं की मौत भी हो चुकी है और वहां परिजनों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। अब जोधपुर के जिला अस्पताल में ठीक वैसा ही घटनाक्रम दोहराए जाने से सरकारी अस्पतालों की शुचिता, दवाओं की गुणवत्ता और हाइजीन (सफाई व्यवस्था) पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पूरे संभाग के प्रसूता परिवारों में इस समय भारी डर और आक्रोश का माहौल है।

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