तैस्सितोरी की 106 वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि और शब्दांजलि आयोजित

तैस्सितोरी की 106 वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि और शब्दांजलि आयोजित
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  • तैस्सितोरी राजस्थान और इटली के सांस्कृतिक एवं साहित्यिक सेतु थे

बीकानेर, 22 नवंबर । राजस्थानी के महान इटालियन विद्वान डॉ. एल. पी. तैस्सितोरी की 106वीं पुण्यतिथि के पावन अवसर पर, शनिवार को सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट के तत्वावधान में तैस्सितोरी प्रतिमा स्थल पर पुष्पांजलि और शब्दांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सांस्कृतिक एवं साहित्यिक सेतु
इंस्टीट्यूट के सचिव, कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने कार्यक्रम में मुख्य विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. तैस्सितोरी राजस्थान और इटली के सांस्कृतिक एवं साहित्यिक सेतु थे। उन्होंने बीकानेर में पाँच साल से अधिक समय तक रहकर चारण और जैन साहित्य पर गहन शोध कार्य किया, जो युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक डॉ. हरि शंकर आचार्य ने कहा कि तैस्सितोरी ने राजस्थानी भाषा और साहित्य की खूबियों को समझा और इसके विकास के लिए भरपूर काम किया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अजय जोशी ने राजस्थानी को संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता दिलाने के सामूहिक प्रयासों को तैस्सितोरी को सच्ची श्रद्धांजलि बताया।

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जन-जन की भाषा बनाने पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सखा संगम के अध्यक्ष एन. डी. रंगा ने राजस्थानी को जन-जन की भाषा बनाने और बच्चों को इससे जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि और गीतकार राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि सीमित संसाधनों के दौर में भी डॉ. तैस्सितोरी का राजस्थानी साहित्य की सेवा में योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

इससे पहले समीक्षक अशफाक कादरी ने स्वागत उद्बोधन दिया। पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में पुस्तकालयाध्यक्ष विमल शर्मा, कवि संजय जनागल, चित्रकार योगेंद्र पुरोहित सहित अनेक साहित्य प्रेमी और गणमान्य नागरिक शामिल रहे। अंत में, गोपाल जोशी ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

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