सरदारशहर निवासी तिरुपुर प्रवासी श्रावक जुगराज श्यामसुखा का संथारा सीझ कर संपन्न
सरदारशहर निवासी तिरुपुर प्रवासी श्रावक जुगराज श्यामसुखा का संथारा सीझ कर संपन्न

बीकानेर/तिरुपुर, 07 अक्टूबर । मूलतः सरदारशहर (राजस्थान) निवासी एवं वर्तमान में तिरुपुर में रह रहे धर्मनिष्ठ श्रावक जुगराज श्यामसुखा (आयु 83 वर्ष) का संथारा (संलेखना) बुधवार प्रातः 8:24 बजे पूर्ण शांति व समाधिपूर्वक सीझ कर संपन्न हो गया। उनके देवलोकगमन की सूचना मिलते ही तेरापंथ समाज एवं जैन संघ में श्रद्धा की लहर दौड़ गई तथा बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उनके संथारे की अनुमोदना की।


आचार्य श्री महाश्रमणजी की आज्ञा से साध्वी सिद्धप्रभाजी ने कराया था पचखान


प्राप्त जानकारी के अनुसार, अस्वस्थता एवं जीवन के अंतिम काल को समीप देख जुगराज जी श्यामसुखा ने जैन परंपरा अनुसार संथारे की भावना व्यक्त की थी। इस पर मंगलवार, 6 अक्टूबर को दोपहर 1:35 बजे शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमणजी की पावन आज्ञा से साध्वी श्री सिद्धप्रभा जी आदि ठाणा-4 के मुखारविंद से उन्हें संथारे का पचखान करवाया गया। साध्वी वृंद ने आर्ष वाणी में नमस्कार महामंत्र, नमोत्थुणं एवं लोगस्स का पाठ सुनाया, जिसके पश्चात परिजनों की सर्वसम्मति से संथारा ग्रहण करवाया गया।
संघीय पदाधिकारियों एवं श्रावकों ने की संथारे की अनुमोदना
संथारा पचखान के समय एवं उसके उपरांत स्थानीय संघीय संस्थाओं के पदाधिकारियों, गणमान्य श्रावकों तथा श्राविकाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। लगभग 19 घंटे की लीनता व अध्यात्म साधना के बाद बुधवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। समाज के प्रबुद्धजनों ने उनके संलेखनापूर्वक जीवन त्याग की भूरि-भूरि अनुमोदना करते हुए उनके आत्मा की सद्गति की मंगल कामना की है।
